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PAK आर्मी का दावा: भारत में घुसकर खाली जगहों पर गिराए बम, जताई अपनी ताकत

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दावा किया है कि उनके लड़ाकू विमान ने भारत के कई इलाकों में बमबारी की है. उन्होंने कहा कि हमारा मकसद भारत को बताना था कि हमारी सेना में दम है. पाकिस्तानी सेना दावा कर रही है कि उन्होंने भारत के दो पायलटों को अपनी हिरासत में लिया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि हमने अपनी स्ट्राइक में कोशिश की थी किसी को नुकसान ना पहुंचे. हमने 6 टारगेट तय किए थे, जिसके बाद हमने स्ट्राइक किया. बिम्बरगरी समेत कई इलाकों में हमने टारगेट किया. हम बस ये बताना चाहते थे कि हम सबकुछ कर सकते हैं, लेकिन इलाके में शांति के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम शांति चाहते हैं युद्ध नहीं करना चाहते हैं. पाकिस्तान के एक्शन के बाद भारत के दो जहाज LoC पर कर पाकिस्तान की सीमा में आए, हमने दोनों को निशाना बनाया. एक भारत की जमीन पर और दूसरा पाकिस्तान की जमीन पर गिरा, दो पायलट को गिरफ्तार किया गया है एक घायल है और दूसरा गिरफ्त में है. उनके पास से कई...

इंदिरा गाँधी को गेंदे के फूल से चिढ़ क्यों थी- विवेचना

भारतीय राजनीति में गेंदे के फूल का अपना महत्व है. कोई भी राजनीतिक आयोजन या स्वागत समारोह गेंदे के फूल के बिना अब भी संपन्न नहीं होता. लेकिन भारत की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को गेंदे के फूल से 'एलर्जी' थी और उनके स्टाफ़ को निर्देश थे कि उनका कोई भी प्रशंसक उनके पास गेंदे के फूल ले कर न आ पाए. बहुचर्चित किताब 'द मेरीगोल्ड स्टोरी- इंदिरा गाँधी एंड अदर्स' की लेखिका और वरिष्ठ पत्रकार कुमकुम चड्ढा बताती हैं, "इंदिरा की पूरी ज़िंदगी में उनके स्टाफ़ की सबसे बड़ी जद्दोजहद होती थी कि गेंदे का फूल इंदिरा गाँधी के नज़दीक न पहुंच जाए. वजह ये थी कि उन्हें गेंदे के फूल पसंद नहीं थे." वो कहती हैं, "अगर कोई उनके पास गेंदे का फूल ले जाने में सफल हो भी जाता था तो उनकी त्योरियाँ चढ़ जाती थीं." "लेकिन उनका ये गुस्सा उन लोगों के लिए नहीं होता था जो उनके लिए फूल ले कर आते थे, बल्कि अपने स्टाफ़ के लिए होता था कि उनके रहते ये कैसे संभव हो सका." गेंदे से ही लिपटा इंदिरा का पार्थिव शरीर विडंबना है कि जब इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद उनके पार्थिव शर...

गणतंत्र दिवस पर क्या ख़ौफ़ में रहते हैं मदरसों के छात्र?

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर सोशल मीडिया में कुछ ऐसी तस्वीरें वायरल होने लगती हैं जिनमें कुर्ता-पायजामा पहने, सिर पर टोपी लगाए और हाथ में तिरंगा झंडा लिए युवा या बच्चा दिखाई देता है. आम तौर पर ये छवि एक मदरसे के छात्र की समझी जाती है. भारत में मदरसों को केवल इस्लामी शिक्षा की एक संस्था के रूप में देखा जाता है. हालांकि, कई मदरसों में हिंदी, अंग्रेज़ी, गणित और विज्ञान भी पढ़ाया जाता है. भारत में विभिन्न फ़िरकों (पंथ) के मदरसे हैं. इनमें सबसे बड़ा मदरसा उत्तर प्रदेश का दारुल उलूम देवबंद है. हाल में दारुल उलूम देवबंद ने अपने हॉस्टल के छात्रों से कहा था कि वे गणतंत्र दिवस की दो दिन की छुट्टियों में यात्रा करने से बचें. इसका कारण उन्होंने ये बताया कि गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था अधिक रहती है और एक डर का माहौल पैदा हो जाता है. इस नोटिस में ये भी कहा गया कि छात्र बहुत ज़रूरी होने पर ही सफ़र करें और किसी से बहस न करें. ऐसे सवाल काफ़ी वक़्त से उठते रहे हैं कि मदरसों में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर कुछ नहीं होता. वहां झंडा नहीं फहराया जा...

मोदी सरकार बेरोजगारों को देगी 'सैलरी', इन देशों में पहले से है लागू

अगर सब कुछ ठीक रहा तो लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार  UBI यानी यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम को देशभर में लागू कर देगी. इस योजना के लागू होने के बाद किसान, व्यापारी और बेरोजगार युवाओं को हर महीने 2,000 से 2,500 रुपये तक की निश्चित रकम मिलेगी. मोदी सरकार का यह प्‍लान गेमचेंजर साबित हो सकता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि बेरोजगारों को पैसे देने की यह योजना पहली बार किसी देश में लागू होगा . फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे देशों में इस तरह की योजनाएं सालों से चल रही हैं. आज हम आपको इस रिपोर्ट में कुछ ऐसे ही देशों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां इस तरह की योजना लागू है. फ्रांस द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप के देशों में फ्रांस ऐसी जगह है, जहां बेरोजगारों को सबसे ज्‍यादा सुविधाएं मिलती हैं. अगर 2017 के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां बेरोजगारों को सरकार सालाना करीब 7 हजार यूरो (5.6 लाख के करीब) की मदद करती है. यानी महीने के हिसाब से 46 हजार रुपये का भत्‍ता मिलता है. हालांकि बेरोजगारों को भी कुछ शर्तों के साथ यह भत्‍ता मिलता है. जर्मनी इसी तरह जर्मनी में भी कई स्‍तर पर बेरोजगारों को...

मनमोहन सिंह ने नरेंद्र मोदी पर कसा तंजः आज की पांच बड़ी ख़बरें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने कार्यकाल के दौरान अब तक संवाददाता सम्मेलन नहीं आयोजित करने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तंज कसा है. मनमोहन ने अपनी किताब 'चेंजिंग इंडिया' के विमोचन के मौके पर कहा कि उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा. मनमोहन ने कहा, "मैं कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था, जिसे प्रेस से बात करने में डर लगता हो. मैं नियमित तौर पर प्रेस से मिलता था, और जब भी मैं विदेश दौरे पर जाता था, लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन ज़रूर बुलाता था." उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी. मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीज़ें हुई हैं, वे पाँच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं." मनमोहन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कस चुके हैं. मनमोहन ने देश के भविष्य के बारे में कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत ...

राफेल सौदे की जांच नहीं, जियो से डील को सोमवार तक एनओसी

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी (59) को शुक्रवार को दो बड़े मामलों में राहत मिली। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील की जांच की मांग वाली याचिकाएं खारिज कर दीं। इस मामले में विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार ने डील में पक्षपात कर अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट पार्टनर बनवाया। दूसरी तरफ रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और जियो की डील को लेकर दूरसंचार विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह सोमवार तक एनओसी जारी कर देगा। आरकॉम 18,000 करोड़ रुपए में अपने असेट्स मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो को बेच रहा है। आरकॉम ने दूरसंचार विभाग के खिलाफ याचिका दायर की थी आरकॉम-जियो डील को लेकर पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरकॉम 2 दिसंबर तक 1,400 करोड़ रुपए की कॉरपोरेट गारंटी दे और दूरसंचार विभाग 9 दिसंबर तक एनओसी जारी करे। आरकॉम ने गारंटी जमा करवा दी लेकिन, तय समय तक दूरसंचार विभाग ने एनओसी जारी नहीं की तो आरकॉम ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। दूरसंचार विभाग के खिलाफ आरकॉम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। दूरसंचार विभाग ने अदालत में क...

मां-बाप दूसरी शादी करते हैं तो बच्चों को कैसा लगता है

"बचपन से जिस कमरे के बारे में बताया गया हो कि मम्मी- पापा का बेडरूम है, उस रूम में जाने वाला शख़्स अगर बदल जाए तो बुरा तो लगता ही है . लेकिन धीरे-धीरे देखने की आदत हो जाती है...फिर कुछ अजीब नहीं लगता." अकांक्षा अब उस दूसरी औरत को अपनी मां मान चुकी हैं और खुश हैं, लेकिन तब इस नए रिश्ते को अपना मान पाना उनके लिए बहुत मुश्किल था. पर सबका अनुभव एक-सा नहीं होता है. कॉफ़ी विद करण में आई सैफ़ अली ख़ान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली ख़ान की यादें और बातें अकांक्षा से थोड़ी अलग हैं. सैफ़ को अब्बा कहने वाली सारा, करीना को छोटी मां नहीं कहतीं हैं. उनका मानना है कि जिस दिन उन्होंने करीना को छोटी मां कह दिया उनका नर्वस ब्रेकडाउन हो जाएगा. उनका सपना है कि वो किसी दिन करीना के साथ शॉपिंग पर जाएं. लेकिन क्या 'सौतेले' रिश्ते इतने दोस्ताना हो सकते हैं? इस पर सारा कहती हैं, "अब्बा और करीना की शादी थी. मम्मा ने ख़ुद अपने हाथों से मुझे तैयार किया और हम अब्बा की शादी में गए." सारा का मानना है कि जो हुआ वो अच्छा हुआ. चाहे वो उनके माता-पिता का अलग होना हो या फिर उनके प...